छठ पूजा 2017 Chhath Puja Festival Essay Date and Importance in Hindi


छठ पूजा (Chhath Puja 2017), एक हिन्दू त्यौहार है जो प्रति वर्ष भारत में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह एक बहुत ही प्राचीन त्यौहार है जिसको डाला छठ, डाला पुजा, सूर्य षष्ठी भी कहा जाता है जिसमे भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। साथ ही लोग सूर्य से अपने परिवार के लिए सुख-शांति, सफलता, की कामना करते हैं। हिन्दू संस्कृति के अनुसार सूर्य की कामना एक रोग मुक्त, स्वास्थ्य जीवन की कामना होती होती है।

 

छठ पूजा 2017 Chhath Puja Festival Essay Date and Importance in Hindi


छठ की रस्म निभाने वाले या पूजा करने वाले उस दिन सुबह बहुत जल्दी उठते हैं। जो लोग गंगा नदी के पास रहते हैं वे गंगा में पवित्र स्नान करते हैं और जो लोग भारत के एनी स्थानों में रहते हैं नदीयों या तालाब में स्नान लेते हैं। वे पूरा दिन उपवास करते हैं और पूरा दिन पानी भी नहीं पीते। उस दिन पूजा करने वाले लोग बहुत ही लम्बे समय तक पानी में आधा शारीर डूबा कर खड़े रहते हैं और सूर्योदय का इंतज़ार करते हैं।

भारत में कई राज्यों में छठ पूजा मनाया जाता है जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड और नेपाल। हिन्दू कैलंडर के अनुसार छठ पूजा कार्तिक महीने के 6वें दिन मनाया जाता है।

छठ पूजा के महत्व को समझने के लिए Video – Latest Chhath Puja Song : Pahile Pahil hum kaili chhathi maiya (2016)

Music Producer – Anshuman Sinha
Presented By – Swar Sharda, Champaran Talkies and NeoBihar
Singer/Conposer – Sharda Sinha
Featuring – Kristine Zedek, Kranti Prakash Jha
Music By- Aditya Dev
Lyrics- Hriday Narayan Jha
Directed by- Nitin Neera Chandra

कार्तिक छठ पूजा 2017 का शुभ मुहूर्त Kartika Chhath Puja Date 2017:
Chhat Puja 2017 Calender, त्यौहार के तारीख: अक्टूबर 24, 2017 – अक्टूबर 27, 20172

Date तारीख Day दिन Event छठ पूजा का शुभ मुहूर्त Tithi तिथि
24th अक्टूबर 2017 मंगलवार Tuesday नहाय खाय Nahay Khay चतुर्थी Chaturthi
25th अक्टूबर 2017 बुधवार Wednesday लोहंडा और खरना Lohanda and Kharna पंचमी Panchami
26th अक्टूबर 2017 गुरुवार Thursday संध्या अर्घ्य Sandhya Arghya षष्ठी Shashthi
27th अक्टूबर 2017 शुक्रवार Friday उषा अर्घ्य, परना दिन Usha Arghya, Parana Day सप्तमी Saptami
कुछ जगह छठी छठ, चैत्र महीने में होली के बाद भी मनाया जाता है।

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छठ पूजा का इतिहास History of Chhath Puja in Hindi
भारत के त्योहारों में छठ पूजा का बहुत ही बड़ा महत्व है। पुराने समय में राजा महाराज, पुरोहितों हो खासकर इस पूजा को राज्य में करने के लिए आमंत्रित करते थे। सूर्य भगवान् की पूजा करने के लिए हवन कुंड के साथ-साथ वे ऋग्वेद के मन्त्रों का उच्चारण भी करते थे।

कहा जाता है छठ पूजा को हस्तिनापुर के द्रौपदी और पंच पांडव अपने दुखों के निवारण और अपने खोये हुए राज्य को दोबारा पाने के लिए किया करते थे। छठ पूजा को सबसे पहले शुरू सूर्य पुत्र कर्ण नें किया था। उनके शौर्य और पराक्रम जितना कहा जाये कम है। यह भी कहा जाता है कि महाभारत के समय उसने अंग देश(मुंगेर डिस्ट्रिक्ट -बिहार) पर राज किया था।

छठ पूजा के दिन छठी मैया Chhathi Maiya यानि सूर्य देव की पत्नी की भी पूजा भी की जाती है। वेदों में छठी मैया Chhathi Maiya को उषा के नाम से जाना जाता है। उषा का अर्थ होता है दिन की पहली रौशनी। उनकी पूजा छठ के दिन मोक्ष की प्राप्ति और मुश्किलों के हल करने की कामना करने के लिए की जाती है।

 

एक और इतिहास से जुडा कहानी यह है कि भगवान् श्री राम और माता सीता नें कार्तिक के महीने में 14 वर्ष के वनवास से वापास आने के लिए धन्यवाद देते हुते, उपवास रखा था और सूर्यदेव की पूजा की थी।

छठ पूजा की कथा/कहानी Story of Chhath Puja in Hindi
बहुत वर्ष पहले की बात है, एक राजा थे जिनका नाम था, प्रियव्रत और उनकी पत्नी का नाम था मालिनी। वे बहुत ही ख़ुशी के साथ रहते थे पर उनके जीवन में एक बहुत बड़ा दुख का विषय था कि उनका कोई भी संतान नहीं था। उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए महर्षि कश्यप की मदद से एक बहुत ही बड़ा यज्ञ करवाया। यज्ञ के वरदान के कारण रानी मालिनी गर्भवती तो हुई परन्तु नौवे महीने में उसने एक मृत शिशु को जन्म दिया। राजा यह देख कर आपा खो बैठे और आत्महत्या करने की सोचने लगे। उनके इस दुख को देख कर देवी खाशंती प्रकट हुई और बोली – हे राजा चिंता छोड़ो। जो मनुष्य मेरी आराधना सच्चे मन से करता है उसे जरूर संतान की प्राप्ति होती है। यह सुन कर राजा प्रियव्रत ने कड़ी तपस्या किया जिसके कारन उन्हें एक सुन्दर संतान की प्राप्ति हुई। उसके बाद से, लोग छठ पूजा मनाने लगे।

छठ पूजा के नियम Chhath puja Traditional Rules in Hindi
यह माना जाता है कि छठ पूजा के समय भक्त अपने परिवार से छोड़ा अलग रहते हैं यानी की कुछ अलग नियमों का पालन करते हैं। पहले दिन के पवित्र स्नान के बाद से वे जमीन पर एक चटाई या कम्बल बीचा के सोते हैं। एक बार छठ पूजा शुरू करने वाले व्यक्ति को नियम अनुसार प्रति वर्ष पालन करना पड़ता है। इसे किसी वर्ष तभी कोई व्यक्ति करना बंद कर सकता है अगर उस वर्ष परिवार के किसी व्यक्ति की मृत्यु हो गयी हो तो।

भक्त सूर्यदेव को मिठाई, खीर, ठेकुआ, और फल के रूप में प्रसाद भेंट चढाते हैं। प्रशाद नमक, प्याज, अदरक, के बिना बनाया गया होना चाहिए।

 

ये वो चार दिन हैं छठ पूजा के –
छठ पूजा 2017 Chhath Puja Festival Essay Date and Importance in Hindi
छठ पूजा 2017 Chhath Puja Festival Essay Date and Importance in Hindi
चतुर्थी Chaturthi – पहल दिन (नहाय खाय Nahay Khay), भक्त नदी में पवित्र स्नान करते हैं और वहां से कुछ पानी एक पात्र में अपने घर, अन्य सामग्री बनाने के लिए लेकर आते हैं। वे आपने घर के आस-पास को साफ़-सुथरा रखते हैं और दिन में एक बार कद्दू-भात भोजन खा कर महापर्व छठ की शुरुवात करते हैं। खाना किसी भी पीतल और मिटटी के बर्तनों में बना होना चाहिए और चुलेह में आम की लकड़ी की मदद से बना होना चाहिए।
पंचमी Panchami – दूसरा दिन (लोहंडा और खरना Lohanda and Kharna), इस दिन भक्त पूरा दिन उपवास करते हैं और शाम को सूर्यास्त के बाद ही अपना उपवास तोड़ते हैं। वे पूजा में रसिओं-खीर, पूरी और फल चढाते हैं। उसके बॉस भोजन करने के बाद वे अगले 36 घंटे के लिए बिना पानी पिए उपवास करते हैं।

षष्ठी Shashthi – तीसरा दिन (संध्या अर्घ्य Sandhya Arghya), इस दिन यानी की छठ का दिन होता है। इस दिन शाम को नदी के घाट पर सभी भक्त संझिया अर्घ्य या संध्या अर्घ्य भगवान् को चढाते हैं। इसके बाद वे छठवर्तियाँ हल्दी के रंग का साड़ी पहनते हैं और परिवार के साब लोग मिल कर कोसी की रस्म मनाते हैं जिसमें वे पञ्च गन्ने की छड़ी को अपने दीयों के चरों ओर रखते हैं। पांच गन्ने के छड़ी पंचतत्व (पृथ्वी, पानी, अग्नि, वायु और अंतरिक्ष) का रूप माना जाता हैं।

सप्तमी Saptami – चौथा दिन (उषा अर्घ्य, परना दिन Usha Arghya, Parana Day), इस दिन अभी भक्त अपने परिवार और दोस्तों के संग गंगा / नदी के किनारे बिहनिया अर्घ्य प्रदान करते हैं। उसके बाद वे अपना ब्रत तोड़ते हैं और छठ प्रसाद ग्रहण करते हैं।
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